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रविवार, 2 सितंबर 2018

“भ्रमर गीत”

सभी साथियों को भगवान श्री कृष्ण जी के जन्म दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाइयाँ । कभी सूरदास जी के पद खुद पढ़ते तो कभी पढ़ाते जहाँ मन अधिक रमा वो थे भ्रमर गीत । इन पदों में कृष्ण का वियोग और गोपियों का उपालम्भ उद्धव जी के आगे सम्पूर्ण तार्किकता के साथ खूब छलका  । आज खुद लिखने बैठी तो गोप-गोपियों के साथ नन्द -यशोदा और राधा की मौन वेदना पुनः मन में साकार हो उठी । एक प्रयास मेरा भी भ्रमर गीत के बहाने बांकेबिहारी को कुछ शिकवे गिले करने का ।
        
      “भ्रमर गीत”

वृन्दावन की कुँज गली
कृष्ण बिना सुनसान पड़ी
कब आएँगे कृष्ण कन्हाई
पूछ रही वृषभान कुँवरि
  
तुम बिन सूनी सारी गलियाँ
राह देखती थक गई अखियाँ
सूने कूल कदम्ब किनारे
ब्रज का मधुवन तुम्हें पुकारे

हो तुम तो निर्मोही सांवरे
संगी साथी सभी बिसारे
नन्द यशोदा बाट निहारे
सूने उनके सांझ-सकारे

मथुरा के वैभव में क्या है
निश्छल सा संसार यहां है
ग्वाल-बाल संग तेरी गैया
जीवन का आधार यहां है

भेजा निर्गुण ब्रह्म का ज्ञानी
सगुण प्रेम की रीति न जानी
माखन मिश्री खा कर कान्हा
कहाँ से सीखी कड़वी बानी

हम तो केवल तुम को जाने
सुख दुख का सहभागी मानें
सांसों में तुम बसे हमारे
उद्धव को हम क्यों पहचाने

ये तो दीखे भ्रमर सरीखा
ज्ञानयोग का भरे खलीता
जाने आया कौन देश से
इसका तो मीठा भी फीका
XXXXX

14 टिप्‍पणियां:

  1. वाह! बहुत मधुर, बहुत सुंदर!!!

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  2. वाह बहुत सुंदर रचना 👌
    तुम बिन सूनी सारी गलियाँ
    राह देखती थक गई अखियाँ
    सूने कूल कदम्ब किनारे
    ब्रज का मधुवन तुम्हें पुकारे

    जवाब देंहटाएं
  3. बहुत सुंदर ... बचपन में भ्रमर गीत पढ़े थे आज फिर उसी रस का आनंद आ गया ...
    बहुत ही सुंदर छन्द और कृष्ण का व्यक्तित्व तो इतना विविध है कि उसे बाँधना विकट है ...
    जन्माष्टमी की बधाई ...

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    उत्तर
    1. जन्माष्टमी के शुभ अवसर पर हार्दिक शुभकामनाएं नासवा जी । रचना की सराहनीय प्रतिक्रिया से अत्यंत हर्ष की अनुभूति हुई हृदयतल से धन्यवाद आपका नासवा जी ।


      हटाएं
  4. अत्यंत मधुर गीत .....कृष्ण जन्माष्टमी के शुभअवसर पर हार्दिक शुभकामनाएं !

    जवाब देंहटाएं
  5. आपको भी कृष्ण जन्माष्टमी के शुभअवसर पर हार्दिक शुभकामनाएं संजय जी . उत्साहवर्धित प्रतिक्रिया के लिए हृदयतल से धन्यवाद :-) .

    जवाब देंहटाएं
  6. ये तो दीखे भ्रमर सरीखा
    ज्ञानयोग का भरे खलीता
    जाने आया कौन देश से
    इसका तो मीठा भी फीका... प्रभु कृष्ण के रंग में रेंज इन भ्रमर गीतों को पढ़ कर आनंद आ गया ... बधाई स्वीकारे

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    उत्तर
    1. 🙏🙏 अति आभार आपका । आपकी सराहनीय प्रतिक्रिया पाकर नवलेखन के लिए मनोबल बढ़ा ।

      हटाएं


“मेरी लेखन यात्रा में सहयात्री होने के लिए आपका हार्दिक आभार…. , आपकी प्रतिक्रिया‎ (Comment ) मेरे लिए अमूल्य हैं ।”

- "मीना भारद्वाज"