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शुक्रवार, 5 अक्तूबर 2018

“सीख” (रोला छंद)

विषम चरण  - ११ मात्राएं
सम चरण  - १३ मात्राएं

( १ )   मन ने ठानी आज , सृजन हो नया पुराना ।
        मिली-जुली हो बात , लगे संगम की धारा ।।

( २ )   हो सब का सम्मान , कर्म कुछ ऐसे कीजै ।
        बने एक इतिहास , देख सुन के सब रीझै ।।

( ३ )   रहना सब को साथ , जिद्द होगी बेमानी ।
        विलग करो अभिमान , छोटी सी जिंदगानी ।।

( ४ )   भोर करे संकेत , हुआ है नया सवेरा ।
         दुनिया एक सराय , मुसाफिर वाला डेरा ।।

( ५ )   होते नहीं निराश , राहें और भी बाकी ।
        मन अपने को साध , वही सुख-दुख का साथी ।।

                         XXXXX

18 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही सुन्दर छंद रचना मीना जी

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  2. ..... वाह मीना जी सभी दोहे बढ़िया है सीख देने वाले ये ज्यादा पसंद आया ... भोर करे संकेत , हुआ है नया सवेरा ।
    दुनिया एक सराय , मुसाफिर वाला डेरा ।

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    उत्तर
    1. आपकी उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया पाकर लिखना सार्थक हुआ अति आभार संजय जी :-)

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  3. वाह!!मीना जी ,बहुत ही खूबसूरत छ़ंद 👌👌

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    उत्तर
    1. आपकी उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार शुभा जी 🙏🙏

      हटाएं
  4. उत्तर
    1. हौसला अफजाई के लिए हृदयतल से धन्यवाद रोहिताश्व जी ।

      हटाएं
  5. ब्लॉग बुलेटिन की दिनांक 05/10/2018 की बुलेटिन, 'स्टेंड बाई' मोड और रिश्ते - ब्लॉग बुलेटिन “ , में आप की पोस्ट को भी शामिल किया गया है ... सादर आभार !

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. ब्लॉग बुलेटिन में मेरी पोस्ट को शामिल करने के लिए सादर आभार शिवम् मिश्रा जी !

      हटाएं
  6. बहुत ही अच्छे छंद ...
    इसी बहाने रोला छंद को जानने का मौका भी मिल गया ...

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. बहुत बहुत आभार नासवा जी हौसला अफजाई के लिए 🙏

      हटाएं
  7. बहुत बहुत आभार लोकेश नदीश जी ।

    जवाब देंहटाएं


“मेरी लेखन यात्रा में सहयात्री होने के लिए आपका हार्दिक आभार…. , आपकी प्रतिक्रिया‎ (Comment ) मेरे लिए अमूल्य हैं ।”

- "मीना भारद्वाज"