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गुरुवार, 21 फ़रवरी 2019

"नीन्द"(हाइकु)

दौड़ धूप में
आकुल व्याकुल सा
गुजरा दिन

थकी सी रैना
नाराज सी निंदिया
बेकल नैना

दूर व्योम में
धुंधले चंदा तारे
नींद में सारे

ओ री पगली !
सुन बात हठीली
आ मेरी गली

थपकी देती
मदिर पुरवाई
भोर  ले आई

,✍️✍️

22 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत खूब ... निंदिया के आँचल तले लिखे सुन्दर हाइकू ...
    लाजवाब ...

    जवाब देंहटाएं
  2. बहुत बहुत आभार नासवा जी ।

    जवाब देंहटाएं
  3. आपकी लिखी रचना "मुखरित मौन में" शनिवार 23 फरवरी 2019 को साझा की गई है......... https://mannkepaankhi.blogspot.com/ पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. "मुखरित मौन में" में मेरी रचना को साझा करने के लिए हृदयतल से आभार यशोदा जी ।

      हटाएं
  4. थपकी देती
    मदिर पुरवाई
    भोर ले आई
    ....बेहद उम्दा नींद को समर्पित हाइकु कमाल के हैं सभी

    जवाब देंहटाएं
  5. वाह बहुत सुन्दर हाइकु मीना जी सार्थक लेखन।
    कुसुम कोठारी

    जवाब देंहटाएं
  6. वाह !! बेहतरीन हाइकु सखी
    सादर

    जवाब देंहटाएं
  7. सुन्दर हाइकु।

    निंदिया आयी,
    संग सपने लायी,
    सुंदर स्वप्न

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. बहुत सुन्दर हाइकु के साथ आपकी प्रतिक्रिया बेहद अच्छी लगी । बहुत बहुत आभार !!

      हटाएं
  8. लाजवाब हायकू नींद पर....बहुत ही सुन्दर ।

    जवाब देंहटाएं


“मेरी लेखन यात्रा में सहयात्री होने के लिए आपका हार्दिक आभार…. , आपकी प्रतिक्रिया‎ (Comment ) मेरे लिए अमूल्य हैं ।”

- "मीना भारद्वाज"