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सोमवार, 25 फ़रवरी 2019

"विविधा"(सेदोका)

अलग अलग मूड से लिखे सेदोका , भावाभिव्यक्ति में विविधता लिए …., इसलिए शीर्षक “विविधा” उचित लगा ।

क्षितिज पार
छिटकी अरुणिमा
जीव जगत जागा
अभिनन्दन
कलरव ध्वनि से
भोर की उजास में

मौन का स्पर्श
स्नेहसिक्त सम्बल
गढ़ता पहचान
निज नेह की
खामोशी की जुबान
अक्सर बोलती है

मिटती नही
वैचारिक दूरियाँ
कैसी मजबूरियाँ
देती हैं क्लेश
कि खत्म नही होते
आपसी मनभेद

       ✍️✍️

22 टिप्‍पणियां:

  1. देती हैं क्लेश
    कि खत्म नही होते
    आपसी मनभेद
    शिक्षाप्रद प्रतिभाशाली लेखनी सुंदर सेदोका लिखा है मीना जी

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. आपकी उत्साहित और संबल प्रदान करती अनमोल प्रतिक्रिया से लेखन को सदैव सार्थकता मिलती है संजय जी ।

      हटाएं
  2. ख़त्म नहीं होते आपसी मतभेद। वाकई बहुत सही लिखा है।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. बहुत बहुत स्वागत आपका ब्लॉग पर एवं ऊर्जावान अनमोल प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत आभार ।

      हटाएं
  3. मिटती नही
    वैचारिक दूरियाँ
    कैसी मजबूरियाँ
    देती हैं क्लेश
    कि खत्म नही होते
    आपसी मनभेद.. . बेहतरीन रचना सखी
    सादर

    जवाब देंहटाएं
  4. नमस्ते,

    आपकी यह प्रस्तुति BLOG "पाँच लिंकों का आनंद"
    ( http://halchalwith5links.blogspot.in ) में
    गुरुवार 28 फरवरी 2019 को प्रकाशनार्थ 1322 वें अंक में सम्मिलित की गयी है।

    प्रातः 4 बजे के उपरान्त प्रकाशित अंक अवलोकनार्थ उपलब्ध होगा।
    चर्चा में शामिल होने के लिए आप सादर आमंत्रित हैं, आइयेगा ज़रूर।
    सधन्यवाद।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. "पाँच लिंकों का आनंद" में मेरे सृजन को शामिल कर मान देने के लिए हृदयतल से आभार रविन्द्र सिंह जी ।

      हटाएं
  5. बहुत सुन्दर मीना जी !
    अब कविवर बिहारी तो हैं नहीं इसलिए गागर में सागर भरना अब कोई आप से सीखे !

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. आपकी स्नेहिल प्रतिक्रिया पा कर मेरा लेखन सफल हुआ ।
      हृदयतल से आभार 🙏🙏

      हटाएं
  6. मौन का स्पर्श
    स्नेहसिक्त सम्बल
    गढ़ता पहचान
    निज नेह की
    खामोशी की जुबान
    अक्सर बोलती है
    बहुत ही लाजवाब....
    वाह!!!

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. ऊर्जावान स्नेहिल और लेखन को सार्थककता देती प्रतिक्रिया के लिए सस्नेह आभार सुधा जी !

      हटाएं
  7. सेदेको विधा में लिखी बहुत प्यारी रचनाएं मीना जी सुंदर सुघड़।

    जवाब देंहटाएं
  8. ऊर्जावान स्नेहिल और लेखन को सार्थककता देती प्रतिक्रिया के लिए सस्नेह आभार कुसुम जी !

    जवाब देंहटाएं
  9. शब्दों को भावनाओं में बखूबी पिरोया है आपने। बधाई।
    मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है।
    iwillrocknow.com

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    उत्तर
    1. बहुत बहुत आभार नीतीश जी । आपके ब्लॉग के निमन्त्रण के धन्यवाद । आप बहुत अच्छा लिखते हैं ।

      हटाएं
  10. बहुत खूब ... अलग अलग अंदाज़ के सेदोका ... पर अपनी बात स्पष्ट से रखते ... भावनाओं की अभिव्यक्ति अच्छी है बहुत ही ...

    जवाब देंहटाएं
  11. हौसला अफजाई के लिए हृदयतल से आभार नासवा जी !

    जवाब देंहटाएं


“मेरी लेखन यात्रा में सहयात्री होने के लिए आपका हार्दिक आभार…. , आपकी प्रतिक्रिया‎ (Comment ) मेरे लिए अमूल्य हैं ।”

- "मीना भारद्वाज"