( 1 )
गर्म अहसास पूरी शिद्दत से मौजूद है
कल कल करते निर्झर कब के सूख गए
ग्लेशियर तो पहले ही कोहिनूर जैसे हैं
( 2 )
ख्वाब की तरह आ बसते हो आँखों में
भोर के साथ स्मृतियाँ भी धुंधला जाती हैं
बस…,आँखों की चुभन तुम्हारा अहसास जताती हैं
( 3 )
एक जैसी ही है संरचना मन और प्याज की
गाँठ के एक बन्धन में मजबूती से बंधी
आवरण टूटा नहीं कि खुलती जाती हैं परत दर परत
xxxxx

