मीठे अहसास
ऊषा किरण
खिलती कलियाँ
वर्षा की बूंदें
उगता सा जीवन
अभिनन्दन करना
सीखो ना ....
कभी खट्टा सा
कभी मीठा सा
कड़वेपन का
अहसास लिए
अनुभूत क्षणों का
मिश्रित स्वाद
कभी चखने से
यूं डरो ना…
देखो सब के
अपने पल हैं
कुछ हँसते से
कुछ रूठे से
लहरों जैसा
गिरता उठता
मेघपुष्प सा
है जीवन
बाँहों में इसे
समेटो ना….
सोचें मेरी कुछ
पगली सी
तुम कुछ भी कहो
पर अपनी सी
रो कर जी लो
या कि हँस कर
जीना होगा
तुम को जीवन
फिर हँस कर
इसको जी लो ना….
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