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गुरुवार, 22 जून 2017

"तुम” (2)

तुम्हारी  मौजूदगी मेरे लिए‎ बड़े मायने रखती है
जब तुम साथ होते हो तो मेरे संग घर की
खामोश दीवारें भी बोल उठती‎ हैं ।

चंचलता की हदें तो तब टूट‎ती हैं
जब  समय पंख लगा कर उड़ता और
नाचता सा भागने लगता है ।

तुम्हारी गैर‎ मौजूदगी में आलस
खामोशी की चादर घर और मन के कोनों
की खूटियों पर टांग देता है ।

तब समय थम सा जाता है
सन्नाटा पसर जाता है और
मन भी नीरवता में डूब जाता है ।

XXXXX

4 टिप्‍पणियां:


“मेरी लेखन यात्रा में सहयात्री होने के लिए आपका हार्दिक आभार…. , आपकी प्रतिक्रिया‎ (Comment ) मेरे लिए अमूल्य हैं ।”

- "मीना भारद्वाज"