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गुरुवार, 9 नवंबर 2017

“त्रिवेणी"

(This image has been taken from google)

  ( 1 )

उगते सूरज से मांगा है उन्नति और विकास
चाँद से स्निग्धता और उज्जवलता ।
 
क्या बताऊँ तुम्हें…..,कि तुमसे कितना प्यार है ।।


  ( 2 )

लम्बी  डगर और उसके दो छोर
बिना मिले अनवरत साथ  साथ‎ चलते हैं‎ ।

जीने का हुनर पगडंडियाँ भी जानती हैं ।।


XXXXX

6 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर त्रिवेणी....

    जवाब देंहटाएं
  2. वाह्ह्ह...बहुत सुंदर त्रिवेणी।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. बहुत बहुत आभार श्वेता जी .आप का ब्लॉग page खुल नही रहा .

      हटाएं
  3. क्या बताऊँ तुम्हें…..,कि तुमसे कितना प्यार है ।।
    मीना जी सुंदर त्रिवेणी के माध्यम से सब कुछ बड़ी सहजता से कह दिया आपने.....कुछ स्मृतियां ताजी हो गईं

    जवाब देंहटाएं
  4. आपकी सराहना सदैव लेखन हेतु प्रेरणा‎दायी होती है संजय जी .

    जवाब देंहटाएं


“मेरी लेखन यात्रा में सहयात्री होने के लिए आपका हार्दिक आभार…. , आपकी प्रतिक्रिया‎ (Comment ) मेरे लिए अमूल्य हैं ।”

- "मीना भारद्वाज"