उस पार बँधी खड़ी है
एक सांसारिक बंधन मुक्त नाव,
किन्तु उसका खिवैया कौन है
यह प्रश्न ..,
तम की चादर में लिपटा पड़ा है ।
रात के घने आवरण को चीर
मन उस पार जाना चाहता है,
जहाँ अनकहे रहस्यों की गांठें खुलें,
और मौन अपने भीतर छिपे अर्थों का
भेद स्वयं प्रकट करे ।
आँखों में थकन उतर आई है,
जैसे अनगिनत यात्राओं की धूल
पलकों पर जम गई हो ।
बहुत दिन बीते
चैन की गोद में सिर रखे हुए,
बहुत समय हुआ
स्वप्नों के निर्भार जल में डूबे हुए ।
अब मन चाहता है
नींद के उस अथाह सागर में उतर जाना,
जहाँ स्मृतियाँ शांत हों,
समय का शोर थम जाए,
और आँखें..,
अपनी सारी व्याकुलता छोड़कर
गहरे विश्राम में खो जाएँ ।
शायद उस पार
सांसारिक बन्धन रहित नाव तो है
मगर खिवैया अब भी अदृश्य है,
वहीं कहीं अनंत में कोई शांतिपूर्ण तट भी होगा
जिस पर पहुँच कर सभी प्रश्न स्वतः मौन हो जाएँगे ।
***
सारगर्भित है आपकी यह अभिव्यक्ति मीना जी
जवाब देंहटाएंसादर नमस्कार सहित हार्दिक आभार जितेन्द्र जी !
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर
जवाब देंहटाएंआपका सादर नमस्कार सहित हार्दिक आभार ।
हटाएंवाह
जवाब देंहटाएंसादर नमस्कार सहित हार्दिक आभार सर ।
जवाब देंहटाएंबंधनों से मुक्त नाव और उसका अदृश्य खिवैया जीवन के उन सवालों की याद दिलाते हैं, जिनके जवाब हम हमेशा खोजते रहते हैं। बहरहाल, मेरा यहाँ आने का एक कारण और भी है। हम लोग मुंशी प्रेमचंद जी की आगामी पुण्यतिथी ३१ जुलाई २०२६ के अवसर पर प्रेमचंद महोत्सव के अंतर्गत "५० दिनों में ५० कहानियाँ" बनाने, सुनाने (और जुटाने की भी!) की ओर प्रयासरत है. अगर आपकी रूचि हो तो इस अभियान में आपका सहर्ष स्वागत है.
जवाब देंहटाएंअधिक जानकारी आपको यहाँ मिल जाएगी - HindiDiscussionForum dot com
धन्यवाद!
जी बहुत बहुत आभार आपके आमन्त्रण हेतु ।प्रयास रहेगा प्रेमचन्द महोत्सव अभियान में सम्मिलित होने का 🙏
हटाएंअब मन चाहता है
जवाब देंहटाएंनींद के उस अथाह सागर में उतर जाना,
जहाँ स्मृतियाँ शांत हों,
जहाँ समय का शोर थम जाए,
और आँखें..,
अपनी सारी व्याकुलता छोड़कर
गहरे विश्राम में खो जाएँ ।
अहा !
कहाँ मिलेगा ऐसा शाँतिपूर्ण तट
शायद वहीं मिलेगा जहाँ अपनी और सबकी मंजिल है ।
शायद उसे पाने के लिए ही दोड़ रहे हैं उम्र भर....
सारगर्भित सुन्दर प्रतिक्रिया हेतु हार्दिक आभार एवं सादर नमस्कार सुधा जी !
हटाएंउस खिवैया की तलाश ही तो जीवन है ... उम्र भर इसकी तलाश रहती है ...
जवाब देंहटाएंसारगर्भित प्रतिक्रिया हेतु सादर नमस्कार सहित हार्दिक आभार नासवा जी !
जवाब देंहटाएंबहुत शांत सुंदर रचना
जवाब देंहटाएंसादर नमस्कार सहित हार्दिक आभार प्रियंका जी !
जवाब देंहटाएंसुंदर रचना
जवाब देंहटाएंसादर नमस्कार सहित हार्दिक आभार सर !
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