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सोमवार, 7 सितंबर 2026

“भोर की किरणें”

आविर्भाव के साथ ही

 धीमे- धीमे गीत गाती हैं 

भोर की किरणें

 

 स्वर्णिम सी उजास में उनकी 

गुनगुनाहट 

आँखें बंद करके मैंने

 बहुत करीब से सुनी है 


  

दिन भर की गहमागहमी में

 यही गुनगुनाहट

कहीं खो सी जाती है 


चाह कर भी सुनना चाहूँ 

तो भी 

दिन में मैं नहीं सुन पाती वह

मध्दम मधुर आवाज़ 



ढलती सांझ के 

धुँधलके में धीमे-धीमे  

 सरकती सी 

वह आती है मेरे समीप 


मानो मुझसे कह रही हो —

जीवन का सार यही तो है 


कुछ पाने की चाह में

 हम दिन भर भागते रहते हैं 

और अंततः

 ठहरना ही सीखते हैं ।


***


14 टिप्‍पणियां:

  1. वाह्ह दी कितने सुंदर भाव पिरोये हैं आपने
    सुंदर संदेश दिया है कि
    इस दुनिया के शोर में, भाग-दौड़ में
    कुछ पल ठहरकर अपने भीतर झांको...
    सहज, संवेदनशील और जीवन के गहरे दर्शन को उजागर करती सुंदर रचना दी।
    सस्नेह
    सादर।
    -------
    नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना मंगलवार ८ सितम्बर २०२६ के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    सादर
    धन्यवाद।

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  2. आपके अनमोल उद्गारों ने लेखनी को सार्थक किया । पांच लिंकों के आनन्द में सृजन को सम्मिलित करने एवं सुन्दर सराहना हेतु स्नेहिल आभार सहित सादर नमस्कार श्वेता जी !

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  3. आपकी यह काव्याभिव्यक्ति गागर में सागर सरीखी है मीना जी

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    1. आपकी सारगर्भित अनमोल प्रतिक्रिया से सृजन सार्थक हुआ ।हार्दिक आभार आ. जितेन्द्र जी !

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  4. कुछ पाने की चाह हमें दौड़ाती है और हर बार लाकर खड़ा कर देती है, पहले का सा रिक्त, सीखने को तैयार ही नहीं हैं हम, पर हर साँझ ऊर्जा से भर देती है, एक नयी शुरुआत के लिए, सुंदर सृजन मीना जी!

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    1. आपकी अनमोल विचाराभिव्यक्ति से सृजन को मान मिला ।हार्दिक आभार अनीता जी !

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  5. उत्तर
    1. आपकी अनमोल प्रतिक्रिया से सृजन सार्थक हुआ ।हार्दिक आभार सर !

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  6. हर साँझ ठहराव की सीख देती है और हर ठहराव फिर नयी भोर में भागने की ऊर्जा...
    बस यही जीवन है
    बहुत सुंदर चिंतनपरक सृजन
    वाह!!!!

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    1. आपकी अनमोल विचाराभिव्यक्ति से सृजन को मान मिला ।हार्दिक आभार सुधा जी !

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  7. उत्तर
    1. आपकी अनमोल प्रतिक्रिया से सृजन सार्थक हुआ ।हार्दिक आभार सर !

      हटाएं
  8. उत्तर
    1. आपकी अनमोल प्रतिक्रिया से सृजन सार्थक हुआ ।हार्दिक आभार मनोज भाई !

      हटाएं

मेरी लेखन यात्रा में सहयात्री होने के लिए आपका हार्दिक आभार 🙏

- "मीना भारद्वाज"