(1)
गहरे में उतरो तो ही मिलते हैं मोती ।
उथले में तो काई-गारा ही हाथ लगता है ।
उत्कृष्टता वक्त और हुनर मांगती है ।।
(2)
खिड़कियों का अस्तित्व ताजगी से जुड़ा है ।
व्यर्थ आगमन बहिर्गमन के लिए नही ।
अनावश्यक हस्तक्षेप से मर्यादाएं टूटती हैं ।।
(3)
चलते रहना है अनवरत गंतव्य तक ।
रूकना और मुड़ कर देखना कैसा ?
नदियों का स्वभाव लौटना नहीं होता ।।
★★★★★