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शनिवार, 20 मई 2017

"पोटली"

 कुछ समेटने की खातिर
कभी भावों में 
कभी कपड़ों  में
 मन से लगे जब गाँठ 
तब बनती है पोटली।

आम आदमी के ख्वाब
कभी मजदूर की रोटी
खुद में ही चुपचाप
बड़े जतन से
बाँध रखती है पोटली

मायावी संसार
परी-कथाओं का अम्बार
भावों के वितान में 
बच्चों की दुनिया
समेट रखती है पोटली।

कभी जीवन की
कड़वाहट
कभी पुलकन भरी
मुस्कुराहट
यादों को परतों में
लपेट रखती है पोटली।

 शैक्षणिक प्रमाण पत्र 
किसी गृहिणी का स्वप्न
घर के किसी कोने में
धूल फांकने से
 सुरक्षित रखती है पोटली।

XXXXX

       

     

4 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत बहुत धन्यवाद संजय जी .

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  2. मन के एक कोने में रखी रहती है यह पोटली आँखें बंद कर प्रत्येक तय को पलट फिर सहेजकर रख दो. इसी पोटली के सहारे जीवन को संबल मिलता है ज़िंदगी की अनमोल धरोहर है यही पोटली. बहुत ही सुन्दर और सारगर्भित सृजन आदरणीया मीना दीदी जी.
    सादर

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. रचना का मर्म स्पष्ट करती सुन्दर सहज व्याख्यायित प्रतिक्रिया के लिए स्नेहिल आभार अनीता ! सस्नेह ।

      हटाएं


“मेरी लेखन यात्रा में सहयात्री होने के लिए आपका हार्दिक आभार…. , आपकी प्रतिक्रिया‎ (Comment ) मेरे लिए अमूल्य हैं ।”

- "मीना भारद्वाज"