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रविवार, 21 मई 2017

“क्षणिकाएँ”

                     (1)
कल के साथ जीना कोई बुराई नही
आज की  नींव कल पर धरी है।
आज की सीख कल  काम आएगी फिर
कल को छोड़ अधर-झूल में कैसे जीया जाए।
                      (2)
यादें और पतंग एक जैसी ही होती हैं
डोर से टूट कर एक शाख पर अटकती है ,
तो दूसरी दिल और दिमाग मे ।
बस एक हल्का सा झोंका …..,और
हिलोर खा बैठी।
                      (3)
तारीफ भी अजीब‎  चीज है
इन्सान को चने के झाड़ पर चढ़ा देती है।
उसका तो कुछ नही बिगड़ता
शामत चने के झाड़ की आती है।

        ×××××××

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- "मीना भारद्वाज"