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बुधवार, 24 मई 2017

"कृषक"

सावन-भादौ
रिमझिम बरखा
हर्षित मन

नव उमंग
निरखै हरीतिमा
हँसें नयन

हाल-बेहाल
जलमग्न संसार
खण्डित स्वप्न

धरतीपुत्र
श्रमशाली मानव
आज विपन्न

XXXXX



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- "मीना भारद्वाज"