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सोमवार, 14 अगस्त 2017

“महारास”

तारों की उजली छाँह तले
जब आसमान के आंगन में ,
चन्दा और चान्दनी
मुदित भाव से मिलते हैं ।

और धरती के इस आंगन में
पुरुवाईयों  के झोको  से,
बेला , चम्पा , गुलाब संग
रजनीगंधा महकते हैं ।।

तब वृन्दावन में यमुना तट पे
पूर्णचन्द्र सम कृष्णचन्द्र ,
वृषभानुसुता और गोपियों संग
महारास में सजते हैं ।।

XXXXX


"कृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर आप सब को परिवार सहित हार्दिक शुभ कामनाएँ"

6 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुंदर शब्द संयोजन खूबसूरत रचना मीना जी।
    आपको भी जनमाष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ।

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. बहुत बहुत‎ आभार श्वेता जी . राधे राधे .

      हटाएं
  2. सुन्दर शब्दों क कमाल ... कान्हा के रास और प्राकृति की गति को जैसे प्राण वायु मिलती है ... तभी महारास रचती है ...

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. बहुत बहुत‎ धन्यवाद दिगम्बर जी . जय श्री कृष्ण .

      हटाएं
  3. सीधे दिल में उतर जाने वाली खूबसूरत रचना
    जनमाष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ।

    जवाब देंहटाएं
  4. बहुत बहुत‎ आभार संजय जी ! जय श्री कृष्ण !!

    जवाब देंहटाएं


“मेरी लेखन यात्रा में सहयात्री होने के लिए आपका हार्दिक आभार…. , आपकी प्रतिक्रिया‎ (Comment ) मेरे लिए अमूल्य हैं ।”

- "मीना भारद्वाज"