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सोमवार, 7 अगस्त 2017

“रेशमी धागे”


रेशमी धागों की माया बड़ी अपरम्पार है
तुम्हारे आने की चाह में
ये कभी कुम्हला जाते हैं
तो कभी उलझ जाते हैं
बंधते तो साल में एक ही बार हैं
मगर बंधन की मजबूत पकड़
बड़ी गहरी होती है
एक बार बंधने के बाद रिश्तों में
दूरी हो या नजदीकी
एक दूसरे की शुभेच्छा की आंकाक्षा
आकंठ आपूरित होती है.

XXXXX

12 टिप्‍पणियां:

  1. ....वाह मीना जी रिश्तों की परख करती सुन्दर एहसासों को संजोये रिश्तों के जितने आयाम आपने अपनी कविता में दिखाए हैं वो आपकी रिश्तों के प्रति संवेदनशीलता को दर्शाता है !

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    1. संजय जी ,मेरी भावनाओं को मान देने के लिए हार्दिक धन्यवाद .

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  2. दिनांक 08/08/2017 को...
    आप की रचना का लिंक होगा...
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी इस चर्चा में सादर आमंत्रित हैं...
    आप की प्रतीक्षा रहेगी...

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. "पांच लिंकों का आनन्द" पर निमन्त्रण के लिए‎ हृदयतल से आभार कुलदीप जी .

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  3. बहुत सुन्दर ! रचना आभार ''एकलव्य"

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. ध्रुव सिंह जी रचना सराहना हेतु आभार .

      हटाएं
  4. बहुत सुंदर रचना मीना जी।

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  5. बहुत‎ बहुत‎ धन्यवाद श्वेता जी .

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  6. सुधा जी , बहुत बहुत‎ आभार .

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  7. क्योंकि ये बह्धन है रक्षा का ... सदा सदा के लिए ... तभी पूरे साल चलता है ... भाव पूर्ण ...

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  8. बहुत बहुत‎ आभार दिगम्बर जी .

    जवाब देंहटाएं


“मेरी लेखन यात्रा में सहयात्री होने के लिए आपका हार्दिक आभार…. , आपकी प्रतिक्रिया‎ (Comment ) मेरे लिए अमूल्य हैं ।”

- "मीना भारद्वाज"