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शुक्रवार, 5 जून 2020

"क्षणिकाएं"

(1)
मुझको समझने के लिए
काफी हैं  शब्दों के पुल
मेरी दुनिया शब्दों से परे
अधूरी सी है ….
(2)
सांसारिक व्यवहारिकता
अभेद्य दीवार सी है
मेरे लिए...
पारदर्शिता के अभाव में
घुटन महसूस होती है
(3)
अचानक …
टूट कर गिरा एक लम्हा
खुद की खुदगर्ज़ी भूल...
सीना ताने खड़ा है
लेने हिसाब
ज़िन्दगी भर का...

*****

30 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर क्षणिकाएँ।
    पर्यावरण दिवस की बधाई हो।

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    उत्तर
    1. सादर आभार सर सृजन की सराहना हेतु । आपको भी पर्यावरण दिवस की बहुत बहुत बधाई ।

      हटाएं
  2. अचानक …
    टूट कर गिरा एक लम्हा
    खुद की खुदगर्ज़ी भूल...
    सीना ताने खड़ा है
    लेने हिसाब...
    ज़िन्दगी भर का.. वाह !लाजवाब सृजन दी सयम को हर पल का हिसाब देना होता है, ज़िंदगी पूछती है ज़िंदगी से कमाया क्या?
    वाह !
    सांसारिक व्यवहारिकता
    अभेद्य दीवार सी है
    मेरे लिए...
    पारदर्शिता के अभाव में
    घुटन महसूस होती है..व्यवहार की दीवार अब अभेद सी है
    वाह !यथार्थ को इंगित करता लाजवाब सृजन दी.

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. सराहना सम्पन्न ऊर्जावान समीक्षात्मक टिप्पणी के लिए स्नेहिल आभार अनुजा ।

      हटाएं
  3. अति सुंदर क्षणिकाएँ ... 💐💐

    जवाब देंहटाएं
  4. जी नमस्ते,
    आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा शनिवार (06 जून 2020) को 'पर्यावरण बचाइए, बचे रहेंगे आप' (चर्चा अंक 3724) पर भी होगी।
    आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    *****
    रवीन्द्र सिंह यादव

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. हार्दिक आभार चर्चा मंच पर सृजन साझा करने हेतु 🙏

      हटाएं
  5. बहुत सुन्दर क्षणिकाएँ।

    जवाब देंहटाएं
  6. सांसारिक व्यवहारिकता
    अभेद्य दीवार सी है
    मेरे लिए...... बहुत सुंदर मीना जी...और सारी की सारी व्यवहार‍िक ज्ञज्ञन भी करा रही हैं

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. आपकी सराहना सम्पन्न प्रतिक्रिया से लेखन का मान बढ़ा ।
      सादर आभार अलकनंदा जी ।

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  7. आपकी क्षणिकाएँ क्षण भर में गहन संदेश दे जाती है
    बढ़िया

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. सराहना सम्पन्न प्रतिक्रिया से सृजन को सार्थकता मिली । बहुत बहुत आभार आदरणीय 🙏

      हटाएं
  8. बहुत सुन्दर क्षणिकाएँ

    जवाब देंहटाएं
  9. किसे कहूँ अच्छा ,यहाँ तो सब है अच्छा ,बेहतरीन

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. ऊर्जावान प्रतिक्रिया के लिए हृदयतल से आभार ज्योति जी ।

      हटाएं
  10. अचानक …
    टूट कर गिरा एक लम्हा
    खुद की खुदगर्ज़ी भूल...
    सीना ताने खड़ा है
    लेने हिसाब
    ज़िन्दगी भर का...

    हम्म्म। ..इतना बड़ा और इतना मुश्किल हिसाब मुश्किल है
    बहुत ही असरदार क्षणिकाएं। .. बहुत गहन लेखन

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. आपकी सराहना से लेखन को सार्थकता मिली जोया जी ।
      बहुत बहुत आभार आपका ।

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  11. बहत खूब हैं सभी ...
    पर आखरी वाला बेहद दिलचस्प ...
    काश ऐसे खड़े हो सकें लम्हे ...

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    उत्तर
    1. आभार नासवा जी 🙏 होता है यूं भी..हो सकता मेरी ही सोच हो ।

      हटाएं


“मेरी लेखन यात्रा में सहयात्री होने के लिए आपका हार्दिक आभार…. , आपकी प्रतिक्रिया‎ (Comment ) मेरे लिए अमूल्य हैं ।”

- "मीना भारद्वाज"